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विकसित भारत-2047 की नींव मजबूत करने में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की निर्णायक भूमिका

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(लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में नीति, शिक्षा और सामुदायिक नेतृत्व का प्रभावशाली संगम) लखनऊ - विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका केवल सहभागिता तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णायक स्तंभ के रूप में उभर रही है! यह सशक्त संदेश बुधवार को लखनऊ में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में उभरकर सामने आया!  यह सम्मेलन अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार एवं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (एनसीएमईआई), भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में चौधरी चरण सिंह सभागार, सहकारिता भवन, लखनऊ में आयोजित किया गया! सम्मेलन का विषय था, “एकता, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्र निर्माण में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका: विकसित भारत @2047”! इस अवसर पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, जनाब दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा लिया गया ‘विकसित भारत’ का संकल्प दीर्घकालिक प्रयासों से ही पूरा हो सकता है! उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में लगभग 20 प्रतिशत आबादी अल्पसंख्यकों की है, जो एक बड़ी संभावनाशील शक्ति है! यदि इस स...

डॉ एम एम अर्शी साहब बहराइच के जाने-माने सर्जन में से एक माने जाते हैं!

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 बहराइच -NKB NEWS- शहर और आसपास के इलाक़ों में उनका नाम इज़्ज़त, तजुर्बे और हुनर के साथ लिया जाता है! लोगों का कहना है कि डॉ. अर्शी ने अपनी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ के लिए समर्पित कर दिया है! वह न सिर्फ़ एक माहिर सर्जन हैं बल्कि एक पाबंद-ए-नमाज़ इंसान, पाँच वक़्त के नमाज़ी और अपने उसूलों पर क़ायम शख़्सियत भी समझे जाते हैं! नजजीपूरva, बहराइच में उनका क्लिनिक सालों से लोगों की सेवा कर रहा है! डॉ. अर्शी ने अपनी मेडिकल लाइफ़ में अनगिनत सर्जरी कामयाबी से अंजाम दी हैं!  चाहे छोटे ऑपरेशन हों या बड़े और नाज़ुक केस! मरीजों का कहना है कि वह इलाज में बेहद तवज्जोह देते हैं, हर मरीज़ की बात धैर्य से सुनते हैं और कोशिश करते हैं कि इलाज आसान, मुफ़ीद और लोगों की हैसियत के मुताबिक़ हो! उनकी शख़्सियत में सादगी और खिदमत दोनों बातें साथ-साथ चलती हैं! कई लोग बताते हैं कि रात-बेरात भी अगर कोई आपातकालीन मामला आ जाए, तो डॉ. अर्शी बिना किसी झिझक के मदद के लिए तैयार हो जाते हैं! उनकी कामयाबी की वजह सिर्फ़ मेडिकल स्किल नहीं, बल्कि अल्लाह पर भरोसा, इंसानी हमदर्दी और मरीज़ों के ल...

मानवाधिकार : अमल से दूर काग़ज़ी फ़साना!

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आज अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस है। पूरी दुनिया भर में मनाया जाता है! सुनने में कितना  मनभावन लगता है न, मानवाधिकार : यानि जाति, धर्म, स्थान, भाषा, रंग, रूप, शिक्षा, संस्कृति आदि किसी भी बैरिकेडिंग से परे वो अधिकार जो हमको आपको सिर्फ इसलिए मिले हैं क्योंकि हम इंसान हैं! और वो भी संवैधानिक रूप से, इन मानकों के आधार पर हमारे देश में हम इंसानों को क्या हक मिले हैं और धरातल पर उनकी वास्तविकता क्या है?  (इसकी पड़ताल किया है स्वतंत्र पत्रकार *राजीव तिवारी बाबा* का ये लेख) कब और कैसे हुई शुरुआत, इस बार क्या है थीम- अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पहली बार आधिकारिक रूप से 1950 में मनाया गया! तब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 दिसंबर 1950 को प्रस्ताव संख्या 423(V) पारित कर हर साल 10 दिसंबर को Human Rights Day मनाये जाने की घोषणा की, 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणापत्र (Universal Declaration of Human Rights - UDHR) को पेरिस में अपनाया था! ये घोषणापत्र मानव इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक है क्योंकि पहली बार विश्व स्तर पर ये त...

5 दिसंबर 1989 को मुलायम सिंह यादव जी पहली बार मुख्यमंत्री बने थे. आइए जानते है उन्होंने किस दल से अपनी राजनीति प्रारंभ की और समाजवादी पार्टी की स्थापना तक पहुंचे

1. सोशलिस्ट पार्टी मुलायम सिंह यादव की जड़ें गांव से जुड़ी हुई हैं। 22 नवंबर 1939 को इटावा के सैफई में पैदा हुए मुलायम को उनके पिता सुघर सिंह पहलवान बनाना चाहते थे, लेकिन मुलायम ने राजनीति के अखाड़े में सफलता पाई। इटावा से ग्रेजुएशन किया और राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए आगरा पहुंचे। छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। राममनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा से जबरदस्त रूप से प्रभावित हुए। पहली बार 1966 में इटावा पहुंचने के बाद उन्हें लोहिया का सानिध्य मिला। 1967 में उन्होंने लोहिया की संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ा। वे जसवंतनगर सीट से उम्मीदवार बने और जीत हासिल की! 2. भारतीय क्रांति दिल 1967 में लोहिया के निधन के बाद सोशलिस्ट पार्टी कमजोर हुई। नतीजा यह रहा कि मुलायम सिंह यादव को भी 1969 के विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा। यूपी में इसके बाद का दौर काफी उथल-पुथल भरा रहा। हालांकि, कुछ समय बाद ही किसान नेता चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय क्रांति दल यूपी में मजबूत हो रहा था। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी ने जबरदस्त पैठ बना ली, लोहिया...

प्रोफ़ेसर ख़लीक़ अहमद निज़ामी, अमरोहा के मशहूर फ़रीदी खानदान के चश्म ओ चिराग़ थे!

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प्रोफेसर ख़लीक़ अहमद निज़ामी, 4 दिसम्बर 1997 यौमें वफात! प्रोफ़ेसर ख़लीक़ अहमद निज़ामी अमरोहा के मशहूर फ़रीदी खानदान के चश्म ओ चिराग़ थे, आपकी पैदाइश 5 दिसम्बर 1925 को अपने आबाई मकान फ़रीद महल मोहल्ला झंडा शहीद में हुई थी! ये क़दीम तर्ज़ का आलीशान मकान आपके परदादा हज़रत इर्शाद अली निज़ामी का बनवाया हुआ है! जो पंजाब में एक्स्ट्रा असिस्टेंट कमिशनर रहे थे! निज़ामी साहब अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी में तारीख़ के प्रोफ़ेसर रहे नीज़ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रहे! सीरिया में हिन्दुस्तान के सफ़ीर (एंबेसडर) भी रहे थे! प्रधान मंत्री वी पी सिंह ने निज़ामी साहब को गवर्नरशिप का ऑफर किया था, लेकिन आपने ये कह कर इंकार कर दिया था कि मुझे अपने बहुत से तहरीरी काम पूरे करने हैं! निज़ामी  साहब तारीख़ और सूफ़िया के तज़किरों पर ऑथोरिटी थे! सिर्फ़ हिन्दुस्तान ही में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में उन्हें सनद माना जाता है! बड़े बड़े मुअर्रिख़ और मुसन्निफ़ीन (historians and writers) ने उनके कोटेशन नकल किए हैं! उनकी तारीख़ निगारी की ख़ास बात ये थी कि उन्होंने तारीख़ में सूफिया पर लिखे गए तज़किरों से म...

मौलाना अबुल हसन 5 दिसम्बर 1913 यौमें पैदाईश

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मुफ़क्किरे इस्लाम हज़रत मौलाना अबुल हसन अली हसनी "अली मियां" नदवी रहमतुल्लाह अलैह (5 दिसम्बर 1913–31 दिसम्बर 1999) एक मुफक्किर एक आलिम एक मुसन्निफ़ एक मुबल्लिग और एक इस्लामी विद्वान के साथ साथ कौमो मिल्लत के एक नब्ज़ शनास थे, मौलाना ने जिन बातों की तरफ उस वक्त मिल्लत की तवज्जोह दिलाई थी!  आज वो तमाम मसाइल हुबहू हमारी आंखों के सामने हैं  आज हम सब हज़रत मौलाना को उनकी यौमे पैदाईश के मौके पर खिराजे अकीदत पेश करते हैं और बारगाहे इलाही में दुआ गो हैं के अल्लाह हज़रत मौलाना की मगफिरत फरमाए और जन्नत में आला मकाम अता फरमाए!!

डिलवरी मेन से रहे होशियार, बिना डिलीवरी के मत दे रुपये!

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लखनऊ -  23 सितम्बर 2025 को स्विगी इंस्टामार्ट ( Swiggy instamart ) पर किये गए आर्डर को राहुल पुत्र राम बिहारी ग्राम खेमारा थाना मानपुर जनपद सीतापुर (अस्थायी पता मड़ियावा, लखनऊ) डिलवरी करने डिपो चौराहा एक घर पहुँचा, तो बिना डिलीवरी दिए घर की छोटी बच्ची से 500/-₹ लेकर भागने लगा, जिसे मौके पर बच्ची की माँ ने पकड़ा, तो राहुल महिला से गाली गलौज और अभद्रता करते हुए हाथापाई करने लगा, कालोनी वासियों ने राहुल को पकड़ कर बैठाया! स्विगी इंसटमार्ट से एक दर्जन से अधिक लोग मौके पर पहुँचे, जहां सभी ने राहुल को ग़लत पाया और सभी ने राहुल की निंदा करते हुए उससे माफ़ी मंगवाया, माफी मांगने के पश्चात राहुल अपने साथियों के साथ वापस चला गया!!